दिल्ली‑एनसीआर में आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में शेल्टरों में शिफ्ट करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में तीखी बहस छिड़ गई है, इसी बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई ने इस मुद्दे पर दायर अर्ज़ी का संज्ञान लेते हुए कहा, “हम इस मामले को देखेंगे,” जिससे संभावित पुनर्विचार/स्पष्टीकरण की संभावना के संकेत मिले हैं.

आदेश में क्या कहा गया था
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली‑एनसीआर की एजेंसियों को निर्देश दिया कि सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों के भीतर पकड़ा जाए और स्थायी रूप से शेल्टरों में रखा जाए, तथा किसी भी कुत्ते को दोबारा सार्वजनिक स्थानों पर न छोड़ा जाए.
- अदालत ने कहा कि बच्चों और शिशुओं को रेबीज़/डॉग‑बाइट के खतरे से हर हालत में सुरक्षित रखना “पहली प्राथमिकता” है, और बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी.
क्यों बढ़ी बहस
- एनिमल राइट्स समूहों का तर्क है कि यह निर्देश Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 की उस व्यवस्था से टकराता है, जिसके तहत स्टरलाइज़ेशन‑वैक्सीनेशन के बाद स्ट्रे डॉग्स को उनके मूल क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए.
- कार्यकर्ताओं और एनजीओ ने आदेश को “अव्यावहारिक/अवैज्ञानिक” बताते हुए विरोध जताया, जबकि कई RWAs और अभिभावक समूह इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं.
जमीनी स्थिति: क्षमता, समयसीमा और चुनौतियाँ
- दिल्ली में स्थायी डॉग शेल्टर क्षमता बेहद सीमित है; अदालत ने 6–8 हफ्तों में कम से कम 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर ढांचा तैयार करने, स्टाफिंग, CCTV और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएँ बनाने को कहा है.
- ग्राउंड रिपोर्ट्स में कुछ ABC सेंटरों पर भीड़‑भाड़, साफ‑सफाई और रिकॉर्ड‑कीपिंग की कमी जैसी समस्याएँ सामने आईं, जिससे बड़े पैमाने पर शिफ्टिंग की व्यवहारिकता पर प्रश्न उठे हैं.
CJI के “हम देखेंगे” के मायने
- CJI की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि कोर्ट इस मसले पर उठे विधिक/व्यावहारिक प्रश्नों—खासतौर पर ABC Rules, 2023 के साथ सामंजस्य, शेल्टर क्षमता और कार्यान्वयन टाइमलाइन—पर सुनवाई में स्पष्टता ला सकता है.
- यह भी संभव है कि कोर्ट सीमित दायरे में स्पष्टीकरण जारी करे या अनुपालन की तौर‑तरीकों पर चरणबद्ध रोडमैप सुझाए, ताकि जन‑सुरक्षा और पशु‑कल्याण दोनों उद्देश्यों में संतुलन बने.
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आगे क्या
- दिल्ली‑एनसीआर की एजेंसियाँ हाई‑रिस्क इलाकों से प्राथमिकता के साथ कैप्चर/शेल्टरिंग शुरू करेंगी और इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट को भेजेंगी.
- समानांतर रूप से, अदालत में अगली सुनवाई में ABC Rules के साथ तालमेल, शेल्टर मानक, और हेल्पलाइन/मॉनिटरिंग जैसे अनुपालन उपायों पर अधिक स्पष्ट दिशा संभव है.
निष्कर्षतः, सुप्रीम कोर्ट का सख्त सुरक्षा‑केंद्रित आदेश और CJI की “हम इस मामले को देखेंगे…” टिप्पणी—दोनों मिलकर संकेत देते हैं कि निकट भविष्य में अनुपालन ढांचे पर अधिक स्पष्ट, चरणबद्ध और मानवीय दिशा‑निर्देश उभर सकते हैं, ताकि बच्चों की सुरक्षा और पशु‑कल्याण के बीच व्यावहारिक संतुलन बनाया जा सके